बहुत पसंद है।

बहुत पसंद है।

 

 

तेरे होंठो की पंखुड़ियों पर,भौरों की तरह मंडराना ।

देखते हुए तेरी झील सी आंखों को ,

बिल्कुल गहरे डूब जाना।।

तेरा हाँथ थामकर दूर तक साथ चलना

तेरी जुल्फों से देर तक ,प्यार से खेलना

बहुत पसंद है।

तेरे सीने से चिपट के ,देर तक गालों को चूमना

बहुत पसन्द है हमे।

बहुत पसंद है बार बार हर बार अपने प्यार का इज़हार करना।

बस नही पसंद है

तुम्हारा इतनी दूर रहना,

इतनी जल्दी जल्दी शांत हो जाना

और यू छोटी छोटी बातों पे परेशान होना

कभी दूर नही जाओगी मुझसे ,न जाना ही चाहती हो पता है मुझे।

बहुत दूर तक और जनम जनम साथ चलेंगे हम

पता है मुझे।

बस चाहता हूँ इतना

कि जब कभी ज़िन्दगी की लहरों के तेज थपेड़े हमे कमजोर करे

तो उनको भी झेलकर यूँ ही साथ बढ़ते रहे हम।

और हाँ

हर बात पर साथ देना और यू ही मुस्कुरा देना

बहुत पसंद है हमे।

admin@praamodyogiraj.com

Author: Praamod yogiraj

RoyalMonk Praamod yogiraj is a proud Indian roaming all around the country and interacting with youths and discussing sprituality, yoga and all other topics especially about contemporary politics.

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