०८ नवम्बर :ब्लैक डे या एंटी ब्लैक मनी डे ?

०८ नवम्बर :ब्लैक डे या एंटी ब्लैक मनी डे ?

 ०८ नवम्बर शाम के ९बजे ,मैं मुम्बई के लोकल बाजार में घूमकर अपने लॉज में अंदर घुसा ,तो लॉज का मालिक बहुत आश्चर्य से टीवी पे घूरे जा रहा था।मैंने एक नज़र टीवी स्क्रीन पे दौड़ाई तो देखा हमेशा की तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने तथाकथित अंदाज़ में भाषण दे रहे थे।मैने कोई खास ध्यान नही दिया ,क्योंकि ये कोई नई बात नही थी।मै तेज़ी से बेड की तरफ बढ़ा लेकिन झटके से फिर रुक गया ।टीवी स्क्रीन पे हैडलाइन चल रही थी आज रात 12 बजे से 500 और 1000 के नोट मान्य नही होंगे।अचानक से झटका लगा।पूरी तरह से समझने के बाद मैं जल्दी से पास के एटीएम पहुँचा और जल्दी से जरूरी रकम निकाली ।

फिर अगले दिन शुरू हुआ अफरातफरी का माहौल।राजनीतिक बयानबाजी,और आम जनता की अग्नि परीक्षा।अग्नि परीक्षा अपने रोज के रोटी पानी का इंतेज़ाम करने की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काले धन पे लगाम लगाने के लिए ,इन बड़े नोटों को बंद कर दिया था ,और ज्यादा से ज्यादा डिजिटल लेनदेन करने की वकालत कर रहे थे।अगले दो तीन दिन एटीएम भी बंद रहे ,और जब वो खुले तो और भी  बड़ी दिक्कत ।लाखों लोग अपना ही पैसा बैंक से निकलने के लिए एटीएम के बाहर लम्बी लम्बी लाइनों में लगे थे।

बाजार में 2000 का नया नोट आ गया था पर उसने दिक्कत और बढ़ा  दी ।सारा दिन लाइन में लगने के बाद बैंक सिर्फ 2000 का नया नोट दे रहा था।और खुदरा विक्रेताओं के पास उसके बदले में खुले पैसे देने के लिए नही थे।रोजमर्रा की चीजे खरीदना दैनिक मजदूरों के लिए सबसे बड़ा प्रश्न बन गया था।
सरकार के इस कदम से काफी लोगों को बड़ा सदमा भी लगा ।जो न जाने कितना पैसा जमा कर के रखे थे ।चोरी छिपे इधर उधर 500 और 1000 के नोट फेंके जाने लगे।लेकिन आम जनता ने कहीं भी धैर्य नही खोया ।

हालांकि कुछ लोगों की जाने भी गयीं।कुछ की शादियां कैंसिल हुई या पोस्टपोन हुई और भी काफी तकलीफे आम जनता ने इस विश्वास के साथ उठाई की चलो आगे राहत मिलेगी और इसका अच्छा फल मिलेगा।उधर मोदी जी सिर्फ 50 दिन का समय मांग रहे थे, वरना किसी भी चौराहे पर फांसी की सजा स्वीकार करने की बात कर रहे थे।जाहिर है जनता उनपर भरोसा दिखा रही थीं।

अब आज की बात करते हैं, नोटबन्दी के एक साल पूरे हुए।सरकार आज के दिन को काला धन विरोधी दिवस मना रही और विपक्ष काला दिवस मना रही। सरकार  उसे देश के लिए लाभदायक बता  रही और विपक्ष उसे संगठित लूट। नोटबन्दी के फैसले का क्या प्रभाव पड़ा आइये हम खुद ही देखते हैं।

क्या मिला देश को ?

  • नोटबन्दी के बाद देश मे अचानक से डिजिटल लेनदेन का प्रतिशत बढ़ गया।इसमे 60 प्रतिशत से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।
  • पैसो का लेनदेन डिजिटल होने से ,अब टैक्स चोरी की सम्भावनाये लगभग खत्म थी ,इएलिये 2016-17 में लगभग84 लाख नए करदाता जुड़े।
  • मोबाइल वॉलेट का प्रयोग बढ़ा।जनवरी 16 में e वॉलेट से सिर्फ 22.14 बिलियन का लेनदेन हुआ था।जो अगस्त 17 तक 72.65 बिलियन तक पहुच गया।

देश ने क्या खोया ?

  • जैसा कि सब कयास लगा रहे थे, देश की जीडीपी को इसकी कीमत चुकानी पड़ी।वो मार्च 16 में जहाँ9.1 प्रतिशत पर थी,जुलाई17 में घटकर 5.7 पर आ गिरी।
  • इसके अलावा छोटे दुकानदारों को काफी घाटा उठाना पड़ा।कुछ का तो व्यापार ही लगभग चौपट हो गया।
  • काफी लोगों को अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा।सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी’ के आंकलन के अनुसार, नोटबंदी के बाद पहले चार महीनों में 15 लाख लोगों ने रोजगार गंवा दिया।

अगर हम इन आर्थिक आंकड़ों के इतर बात करे ,तो सबसे पहला प्रश्न आता है काले धन का।क्या नोटबन्दी के बाद देश से काला धन खत्म हुआ या उसपर लगाम लगी ? सरकार तो इसका जवाब हां में दे रही लेकिन वास्तविकता कुछ और ही बयान हो रही।नोटबन्दी के बाद ही सैकड़ो करोड़ की नई मुद्रा गुजरात के एक व्यापारी महेश शाह के पास पकड़ी गई। उसके पास इतनी नही मुद्रा कहाँ से आई?
दूसरी बात सरकार ने बार बार नोट  बदलने के नियमो में बदलाव किए। और फिर जब 1000 और 500 के नोटों को बंद किया तो उससे भी बड़ा 2000 के नोट को चालू करने का क्या औचित्य?

निश्चित  तौर पे नोटबंदी  नरेंद्र मोदी द्वारा जल्दबाज़ी में लिया  गया एक साहसिक और हठी फैसला था,जिसके बारे में RBI के गवर्नर से सलाह लेना भी उचित नही समझ गया।और रही बात डिजिटल ट्रांसफर और कैशलैस इकॉनमी की तो ये काम बिना नोटबन्दी के भी किये जा सकते थे।और फिर भी अगर ये कड़वी दवा पिलानी ही पड़ती तो कम से कम जरूरी संस्थानों और व्यक्तियों से सलाह लेनी चाहिए थी।

फिर भी  देश को नरेंद्र मोदी के साहसिक कदम के लिए आभार व्यक्त करना चाहिए और उसे लागू करने में हुई खामियों और दिक्कतों के लिए प्रधानमंत्री को अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए।

admin@praamodyogiraj.com

Author: Praamod yogiraj

RoyalMonk Praamod yogiraj is a proud Indian roaming all around the country and interacting with youths and discussing sprituality, yoga and all other topics especially about contemporary politics.

One thought on “०८ नवम्बर :ब्लैक डे या एंटी ब्लैक मनी डे ?

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Translate »